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महेंद्रगढ़ स्कूल बस हादसा: हाई कोर्ट ने खारिज की अवमानना याचिका, 6 बच्चों की गई थी जान

school bus

School bus accident on court: महेंद्रगढ़, कनीना में हुए स्कूल बस हादसे के केस में पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल याचिका खारिज कर दी गई है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को दूसरी याचिका यानी PIL फाइल करने को कहा है।

क्यों खारिज हुई याचिका ?

याचिकाकर्ता अधिकवक्ता बलराज गुर्जर ने बताया कि वह एक-दो दिन में इस मामले में पीआईएल दाखिल करेंगे। इस हादसे को अधिकारियों की नाकामी का परिणाम बताते हुए हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी अधिकारियों ने सेफ स्कूल व्हीकल पॉलिसी पर काम नहीं किया गया, जिसके कारण लगातार स्कूल बस दुर्घटनाएं हो रही हैं। याचिका में संबंधित सभी अधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट की अवमानना के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में ट्रांसपोर्ट विभाग के प्रधान सचिव, ट्रांसपोर्ट कमिशनर व महेंद्रगढ़ डीसी, एसपी सहित 12 अधिकारियों को पार्टी बनाया गया है। कनीना स्कूल बस हादसे में 6 स्टूडेंट्स की मौत हो गई है, और 15 से अधिक बच्चे घायल हैं, जिनमें दो की हालत गंभीर बनी हुई है।

महेंद्रगढ़ स्कूल बस हादसा: हाई कोर्ट ने खारिज की अवमानना याचिका, 6 बच्चों की गई थी जान

सरकार दाखिल कर चुकी हलफनामा

सरकार ने सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी सही ढंग से लागू करवाने के लिए स्कूली बसों की जांच के लिए कमेटी का गठन करने की बात भी अपने हलफनामे में कही थी। इस कमेटी में तकनीकी विशेषज्ञ, मोटर वाहन इंस्पेक्टर, पुलिस व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शामिल करने का दावा किया गया था, लेकिन महेंद्रगढ़ बस हादसे ने स्कूल शिक्षा और परिवहन विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली की सच्चाई की पोल खोलकर रख दी है।

हाईकोर्ट ने दिया था यह आदेश

हाई कोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए पंजाब और हरियाणा दोनों राज्य सरकारों को ठोस नीति बनाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। हाई कोर्ट के आदेश पर हरियाणा और पंजाब दोनों सरकारों ने नीति बनाने की बात कही थी। हरियाणा ने सुरक्षित स्कूल वाहन नीति तो पंजाब ने इसी तरह की पॉलिसी बनाकर इसे लागू किया था। इस पॉलिसी के तहत राज्य और जिला स्तर पर समितियां गठित कर समय-समय पर बसों की जांच करने का प्राविधान किया गया। इन बसों में मासूमों की सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध करने की व्यवस्था की गई।

हरियाणा सहित 3 राज्यों को दिया था आदेश

हाईकोर्ट ने इससे पहले इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ के राज्य बाल कल्याण समितियों को आदेश दिया था कि वह स्कूली बसों की जांच करें। हाईकोर्ट ने स्कूली बसों को पास करने में डीटीओ द्वारा सही जांच न करने पर भी सवाल उठाते हुए कहा था कि उनके संज्ञान में आया है कि डीटीओ बस पास करते समय सही मापदंड की पालना नहीं करते।

बेंच ने स्पष्ट किया था कि अगर किसी बस में सेफ स्कूल वाहन की नीति पालना नहीं होती तो उसके लिए प्रिंसिपल जिम्मेदार होंगे।हाईकोर्ट ने राज्य बाल कल्याण परिषद को निर्देश दिया था कि वह राज्य की सभी स्कूल बसों की जांच करते रहें और यह जांच करें कि क्या स्कूली बसें सुरक्षित वाहन नीति की पालना कर रही हैं।

दिया जाता ध्‍यान तो नहीं होता हादसा

हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट में जो हलफनामा दिया था, यदि उस पर सही ढंग से काम कर लिया गया होता तो ऐसा हादसा नहीं होता। अब इस बात की कोई गारंटी नहीं रह गई कि भविष्य में भी ऐसे हादसे नहीं होंगे, क्योंकि शिक्षा व परिवहन विभाग की किसी तरह की कोई तैयारी नहीं है।

हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट में दायर हलफनामे में बताया था कि राज्य के स्कूलों में बच्चों को प्रताड़ना व परेशानी से बचाने के लिए स्कूली बसों की रूट पर जांच न करते हुए स्कूलों में जांच की जा रही है। समय समय पर नियमों के खिलाफ चल रही बसों की जांच का प्रविधान किया गया है तथा चालान काटकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

हरियाणा में नई नायब सैनी सरकार में परिवहन मंत्री असीम गोयल हैं। इन्होंने हादसे के बाद 20 अप्रैल से स्कूल बसों का विशेष चेकिंग अभियान शुरू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक मंत्री के आदेश धरातल पर नहीं दिखाई दे रहे हैं।

2014 में भी हो चुका हादसा

हरियाणा सरकार के इस जवाब पर विश्वास करते हुए हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याची पक्ष को छूट दी थी कि अगर उसे सेफ स्कूल वाहन नीति के खिलाफ कोई शिकायत है तो वह संबंधित अथॉरिटी को शिकायत दर्ज करवा सकता है। इस मामले में दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि निगरानी के अभाव में स्कूल बसों के साथ हादसों की संख्या बढ़ रही है। भिवानी के बाल क्रांति ट्रस्ट की ओर से दाखिल जनहित याचिका में बताया गया था कि वर्ष 2014 में स्कूल बस दुर्घटना में कई मासूमों की जान चली गई थी।

अधिकारियों ने जिम्मेदारी से मुंह मोड़ा

स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन नीति और मानक तैयार करने के लिए राज्य, जिला और उप जिला स्तर की समितियां गठित करने का दावा सरकार की ओर से किया गया है। प्रदेश स्तरीय कमेटी इस पॉलिसी और स्कूल बसों की सुरक्षा के लिए तैयार मानकों को लागू कराएगी। परिवहन विभाग के प्रधान सचिव इसके अध्यक्ष हैं।

 

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