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आर्मी जवान ने ओलंपिक में रोशन किया भारत का नाम: करनाल में खुशियां मना रहा परिवार

Balraj pawar

Balraj pawar: करनाल के कैमला गांव के बलराज पंवार ने रोविंग M-1X ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया है। बलराज आर्मी में है और पूणे में उसकी ड्यूटी है। आर्मी की तरफ से ही बलराज गेम खेलता आया है। नेशनल में भी तीन गोल्ड मेडल बलराज ने अपने नाम किए हैं। महज चार साल की कड़ी मेहनत ने बलराज को ओलंपिक तक पहुंचा दिया।

कैमला गांव का यह बेटा और आर्मी का जवान देश के लिए सोना जीतने के लिए ओलंपिक खेलेगा। परिवार में खुशी का माहौल है और बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। खुशी की इस घड़ी में बलराज की मां अपने स्वर्गीय पति को याद कर रही है। बलराज की मां बताती है कि अगर आज बलराज के पिता जिंदा होते तो खुशी से नाच उठते। परिवार को पूरी उम्मीद है कि ओलंपिक में बलराज देश का नाम रोशन जरूर करेगा।

Balraj pawar

15 अप्रैल को गया था साउथ कोरिया

गांव कैमला निवासी 25 वर्षीय बलराज पंवार पुत्र स्वर्गीय रणधीर सिंह वर्ष 2018 में आर्मी में भर्ती हुआ था। पहले उसकी ट्रेनिंग रुड़की में हुई और उसके बाद पूणे में उसकी पोस्टिंग हुई। वहीं पर उसका नौकायन में रूचि बन गई। दो महीने पहले बलराज चाइना गया था, जहां पर उसने प्रैक्टिस की और अपनी प्रफोर्मेंस के दम पर साउथ कोरिया के लिए सलेक्शन करवाया। 15 अप्रैल को बलराज साउथ कोरिया में गया और 15 दिन तक प्रैक्टिस करता रहा, जहां पर भी उम्दा परफॉर्मेंस दी और वहां से वह ओलंपिक के लिए क्वालीफाई हुआ।

Balraj pawar's brother

बेटे की सेहत की भी रहती है चिंता

मां कमला देवी का कहना है कि नौकायन में 8 से 9 घंटे की प्रेक्टिस डेली करनी पड़ती है। जिसमें मेहनत भी बहुत ज्यादा लगती है। इतनी मेहनत के बाद काफी कमजोर शरीर दिखाई देता है। जब भी कभी घर आता है या फिर वीडियो कॉल पर बात होती है तो उसे देखकर एक ही बात मुहं से निकल जाती है कि बेटा काफी कमजोर हो गया है। ओलंपिक में सलेक्शन की खुशी इतनी है कि शब्दों में बयां नहीं कर सकती। उम्मीद है कि ओलंपिक में मेरा बेटा गोल्ड जीतकर आएगा और देश का नाम रोशन करेगा। बहन मनीषा व छोटे भाई संदीप का कहना है कि यह देश के लिए गौरव की बात है और उनका भाई देश का मान सम्मान और गौरव बढ़ाएगा।

पिता की मौत और मां की मेहनत

बलराज के पिता रणधीर सिंह की करीब 13 साल पहले मौत हो चुकी है। जो ठेके पर जमीन लेकर खेतीबाड़ी करते थे। बीमारी के कारण मृत्यु होने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट चुका था। रणधीर अपनी पत्नी और छह बच्चों को पीछे छोड़ गए थे, जिसमें 4 बेटियां और दो बेटे है। घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। ऐसे में बच्चों की मां कमला देवी को फैक्ट्रियों में काम करना पड़ा। मजदूरी करनी पड़ी। वह अपने बच्चों को अच्छा भविष्य देना चाहती थी।

बाल भवन में की 10वीं तक पढ़ाई

सातवीं कक्षा में बलराज का एडमिशन मधुबन के बाल भवन में करवा दिया गया। जहां पर उसने 10वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद बाल भवन सोनीपत में एडमिशन करवा दिया गया। 12वीं तक की पढ़ाई वहीं पर की और इसके बाद सोनीपत में ही पॉलिटेक्निक में एडमिशन लिया और ढाई साल तक पढ़ाई की और फिर स्टेडियम में दौड़ लगानी शुरू की और आर्मी के लिए ट्राई किया और एक साल तक दौड़ लगाई और 2018 में आर्मी में भर्ती हुआ था।

आर्मी के लिए बलराज ने पहले भी प्रयास किया था लेकिन सिलेक्ट नहीं हो पाया था। परिजनों के मुताबिक, तीन बहनों के बाद बलराज, बलराज के बाद एक बहन और फिर एक छोटा भाई संदीप है। बलराज की 21 नवंबर 2021 को शादी हुई थी। जिसकी एक रवनीत नाम की एक साल की बच्ची भी है।

पहले जीते है नेशनल मेडल

बलराज के भाई संदीप ने बताया कि बलराज ने 2 हजार मीटर रोविंग में तीन गोल्ड जीते है। पुणे में रोविंग चैंपियनशिप 2022 में गोल्ड मेडल जीता था। एशियन गेम्स चाइना 2023 में गया था और वहीं पर फोर्थ पोजीशन आई। गोवा में 2023 नेशनल गेम्स हुई गोल्ड जीता। नेशनल चैंपियनशिप पुणे 2024 में गोल्ड मेडल जीता और ओपन स्प्रिंट 500 मीटर में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। संदीप का कहना है कि जिस गेम में बलराज खेलता है उसे एम वन एक्स बोलते है।

जब भर्ती हुआ था तो उसके कोच ने बलराज का ट्रायल ले लिया था, उसकी प्रफोरमेंस काफी अच्छी रही, जिसके बाद उसे पूणे में ट्रायल हुआ था और ट्रायल के बाद बलराज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, उसके करीब चार साल इस गेम में हो चुके है और चार साल में ही ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई हो गया। यह हमारे लिए भी गर्व की बात है और ओलंपिक में भी बलराज सफलता के झंडे गाड़ेगा।

विश्वास था क्वालीफाई हो जाएगा

बलराज की बहन मनीषा का कहना है कि जिस तरह से हर एक गेम में पार्टिसिपेट करता है और हर गेम में गोल्ड जीतकर आता है तो हमें बहुत ज्यादा विश्वास था कि उसका सलेक्शन ओलंपिक के लिए होगा। चाइना जाने के बाद बलराज की प्रमोशन हो गई थी और वह हवलदार बन गया था। अगर ओलंपिक जीतकर आता है तो उसे सूबेदार बना दिया जाएगा। हमें पक्का यकीन है कि मेरा भाई जीतकर आएगा और देश का नाम रोशन करेगा।

मजदूरी करती थी मां

पति की मौत के बाद कमला देवी ने अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए मजदूरी करनी पड़ी। ईट पत्थर भी ढोए और अपने बच्चों को आगे बढ़ाने का काम किया। जब बेटा भर्ती हुआ तो ट्रेनिंग के बाद उसकी पहली सेलरी आई तो उसके बाद कमला देवी ने मजदूरी करनी छोड़ दी। कमला देवी का कहना है कि मेरा सपना था कि मेरे बेटे और बेटियां पढ़ लिखकर आगे बढ़े।

कमला देवी का कहना है कि,बेटियों की भी शादी अच्छे घरों में हुई है। अब किसी चीज की कोई चिंता नहीं है। अब उसके पिता जिंदा होते तो आज बहुत खुश होते। जब बलराज छोटा था तो बोलता था कि मैं फौज में जाउंगा और बचपन की बात का हम भी हंस कर टाल देते थे, लेकिन जब वह भर्ती हुआ तो उसकी बचपन वाली बात याद आ गई। अब ओलंपिक में जाएगा, तो इससे बड़ी कोई खुशी नहीं है मेरे लिए।

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