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सिरसा के 15 गांव ने BJP का किया बहिष्कार,घोषणा के बाद भी विकास कार्य नहीं करने का आरोप

सिरसा BJP BYCOTTE

Bjp bahishar: बीजेपी चाहे कितना भी पीएम मोदी के नाम पर विकास कार्य करने की बात कहे लेकिन सिरसा के हालात तो कुछ और ही बयां कर रहे है। यहां धींगतानिया व भंभूर सलारपुर खरीफ चैनल (नहर) के निर्माण की मांग को लेकर 2 महीने से लघु सचिवालय में धरने पर बैठे 15 गांवों के किसानों ने लोकसभा चुनाव के बीच शुक्रवार को बड़ा ऐलान किया। लोकसभा चुनाव में 15 गांवों के किसान बीजेपी उम्मीदवार का विरोध करेंगे और गांव में घुसने तक नहीं देंगे। इसके अलावा बीजेपी नेताओं का सामाजिक बहिष्कार भी करेंगे।

15 गांव ने किया बीजेपी का बहिष्कार

15 गांवों की किसान संघर्ष समिति के सचिव जगरूप सिंह चौबुर्जा ने बताया कि लघु सचिवालय सिरसा में किसानों के धरने को 2 माह से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन बीजेपी सरकार ने उनकी कोई सुध नहीं ली। सरकार किसानों की समस्या का कोई समाधान नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि उक्त गांवों के किसान 15 सालों से लड़ाई लड़ रहे हैं, परंतु सरकार ने सिंचाई पानी की मांग पूरी नहीं की।

घोषणा के बाद भी नहीं हुआ विकास कार्य

जगरूप सिंह का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने धींगतानिया व भंभूर- सलारपुर खरीफ चैनल का निर्माण करने की घोषणा 2019 में की थी। घोषणा के बाद अब तक चैनल का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया। ग्रामीणों को कहना है कि वर्ष 2019 में खरीफ चैनल के निर्माण के लिए बजट राशि जारी हो चुकी है, लेकिन आगे कुछ नहीं हुआ।

भूजल दूषित होने की समस्या से परेशान ग्रामीण

धरनारत किसानों कहना है कि दोनों खरीफ चैनल के निर्माण से 15 गांवों के किसानों को फायदा होगा। क्योंकि 15 गांवों की जमीन सिंचाई हेतु पानी नहीं मिलने का कारण बंजर होती जा रही है। भूजल दूषित हो चुका है और 500 फीट गहराई में जा चुका है। ऐसे में ग्रामीणों को सिंचाई के लिए नहर निर्माण की काफी जरूरत है। इससे उनकी जमीन को संजीवनी मिल जाएगी।

उन्होंने बताया कि जब तक सरकार धिगतानिया व भंभूर सलारपुर खरीफ चैनल का निर्माण शुरू नहीं करती, तब तक धरना जारी रहेगा। लोकसभा चुनाव में किसान बीजेपी सरकार को सबक सिखाएंगे। धरने पर गांव खाजा खेड़ा, रंगड़ी खेड़ा, टीटू खेड़ा, रामनगरिया, धिगतानिया, मोडिय़ा खेड़ा, नानक पुर, नटार, रंगडी खेड़ा, ढाणी जस्सा राम, चौबुर्जा व भंभूर के सैकड़ों किसान बैठे हैं।

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